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हकलाना कैसे ठीक करें – Stuttering Treatment in Hindi

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हकलाना कैसे ठीक करें ? क्या आप भी बोलते वक़्त हकलाते है तो इसको कैसे करे दूर

हकलाना कैसे ठीक करें : इस ब्लॉग में हम जानेंगे की कैसे तुतलाना/हकलाने की समस्या से निजात पा सकते है या इसको कम कर सकते है। हकलाना (stammering) एक ऐसी स्थिति है जिसमे कोई व्यक्ति किसी बात को धारा प्रवाह रूप से कहने में असमर्थ होता है और बिच बिच में अटकने लगता है। मांशपेशियों का अनियंत्रित रूप से हिलने की वजह से यह समस्या दिखाई देती है। हलकाने की समस्या किसी भी उम्र में उत्पन्न हो सकती है और व्यक्ति का आत्मविश्वास कम कर सकती है क्यूंकि अगर आप किसी सभा में या दोस्तों के बिच में बहुत चाव से कुछ कहने का प्रयास करते है लेकिन हकलाने की वजह से बात अधूरी रह जाती है।

हकलाना एक भाषण विकार है जो आपके बात करने की लय और प्रवाह को प्रभावित करता है। यह विकार आपके बोलने के तरीके को बाधित करता है, जिससे अनपेक्षित आवाजें, रुकावट या सुचारू रूप से बात करने में अन्य समस्याएं पैदा होती हैं। यह एक ऐसी स्वास्थ्य दशा है जिसका उपचार संभव है इसलिए आपको चिंता करने की जरुरत नहीं है। इस ब्लॉग के माध्यम से आपको इस बीमारी से जुड़ी सभी जानकारी मिलेगी और उपचार के तरीके भी बताये जायेंगे। 

हकलाने या तुतलाने के प्रकार 

विकासात्मक हकलाना : यह बच्चे के जन्म के शुरूआती दौर में होने वाली स्थिति है जिसमे मस्तिष्क का विकास अलग तरीके से होता है। 

लगातार हकलाना : यह बचपन से लेकर व्यस्क होने तक लगातार रहने वाली समस्या है।  

अर्जित हकलाना : यह स्थिति किसी प्रकार के चोट लगने से या न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर के कारण उत्पन्न होती है। यह किसी भी उम्र में हो सकती है। 

आप देख सकते हैं की यह एक ऐसी स्थिति है जो बोलने के प्रवाह को बाधित करती है और यह जन्मजात या बाहरी कारकों से प्रभावित भी हो सकती है। 

बचपन में हकलाने की समस्या 1% से 2.4% बच्चों को प्रभावित करती है। लगातार हकलाना लगभग 0.3% से 1% वयस्कों को प्रभावित करता है। आम तौर पर अधिग्रहीत हकलाना कैसे होता है, इस पर सीमित शोध है।

हकलाने के कारण :

शोधकर्ताओं के द्वारा अभी तक इसका कोई निश्चित कारण तो नहीं बताया गया है लेकिन कुछ ऐसे कारक हैं जो इसके लिए जिम्मेदार हो सकते हैं : 

  • परिवार में हकलाने का इतिहास : यदि आपके परिवार में पहले किसी (माता पिता, भाई, बहन) को हक़लाने की समस्या रही हो तो आपमें इसके होने की सम्भावना तिगुनी हो जाती है। 
  • बोलने में जिन अंगों का इस्तेमाल होता है उनकी मांशपेशियों में किसी तरह की बाधा पहुंचना। 
  • न्युरोमस्कुलर से जुड़ी समस्या। 
  • चिकित्सा विज्ञान के नए शोधों के अनुसार अब इसके लिए मनोवैज्ञानिक कारक भी जिम्मेदार हो सकते हैं। जैसे बहुत ज्यादा घृणा, उत्तेजना, तनाव, आत्मविश्वास की कमी, आदि। 

हकलाने का उपचार – Stammering Treatment

हकलाने की समस्या को दूर करने के लिए व्यायाम : चूँकि हकलाने की समस्या मांसपेशियों के नियंत्रण बिगड़ने की वजह से होता है इसलिए उसे व्यायाम के द्वारा सही किया जा सकता है। आपको बोलने में जिन अंगों का इस्तेमाल होता है उनके मूवमेंट से जुड़ी एक्सरसाइज करना चहिये जैसे जबड़े, जीभ, फेफड़े, ट्रैकिया। इन अंगों को आप जितनी शक्ति प्रदान करेंगे आपके लिए उतना अच्छा होगा। किसी एक्सपर्ट की गाइडेंस में आप इन एक्सरसाइजेज को नियमित रूप से करें इससे आपकी स्थिति में सुधार होगा और आत्मविश्वास भी बढ़ेगा। 

हकलाना कैसे रोके ? 

बेझिझक अपने विचार व्यक्त करें :

हकलाना कैसे ठीक करें – हकलाने की समस्या ऐसी है जिसे कोई व्यक्ति चाहकर भी छुपा नहीं सकता है, आप किसी भी महफ़िल में जब बोलने का प्रयास करते हैं तो यह अपने आप जाहिर हो जाता है जिससे आपकी बातों का प्रभाव और प्रवाह दोनों बाधित होते हैं। यह समस्या धीरे धीरे व्यक्ति का मनोबल कम कर देती है और वह हीन भावना से ग्रसित हो जाता है। इसलिए घर के सदस्यों को इनका मनोबल बढ़ाना चाहिए जिससे वो बेझिझक अपने विचार व्यक्त करें और अपना आत्मविश्वास बढ़ा पाएं। ऐसा करने से उन्हें घर के बाहर भी बोलने में मदद मिलेगी और हकलाने की समस्या कम होगी। 

पारिवारिक समर्थन :

हकलाने वाले किसी भी व्यक्ति की स्थिति में सुधार के लिए परिवार के अन्य सदस्यों का समर्थन बहुत जरुरी है। परिवार के लोगों को उनकी बात ध्यान से सुननी चाहिए और बोलते वक़्त उन्हें बीच में रोकना नहीं चाहिए। अगर वो बोलते बोलते बीच में अटक जाते हैं और कोई शब्द पूरा नहीं कर पते हैं तो उसे बोलकर आप पूरा न करें बल्कि धैर्य रखें जिससे वो खुद थोड़ा समय लेकर अपनी बात कह पाएं। ऐसा करने से उनका विश्वास बढ़ता है।  

मेडिटेशन करें :

ध्यान करने से व्यक्ति का चित्त शांत होता है और वह किसी भी काम में एकाग्रचित्त होकर लग पाता है जिससे आत्मविश्वास बढ़ता है और माइंडफुलनेस होकर प्रयास करने में भी मदद मिलती है। इसलिए हकलाने वाले व्यक्ति को नियमित मेडिटेशन करने का सुझाव दिया जाता है।


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